भारत की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा ज्वालामुखी फट पड़ा है, जिसके लावे ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग (Election Commission of India) की निष्पक्षता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कथित चुनावी चाणक्यनीति को झुलसा कर रख दिया है। युवाओं की बुलंद और बेखौफ आवाज बन चुकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र की सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला है, जिसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दीपके का यह आक्रोश कोई सामान्य राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह उस "चुनावी पटकथा" के खिलाफ एक खुली बगावत है, जिसके तार सत्ता के शीर्ष और चुनाव आयोग के बंद कमरों से जुड़े होने का सनसनीखेज दावा किया जा रहा है।चुनाव आयोग के भीतर की बगावत और 48 घंटे का अल्टीमेटम
दिल्ली में आयोजित एक बेहद तड़कती-भड़कती और आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। दीपके ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर ज्ञानेश कुमार अपनी कुर्सी नहीं छोड़ते हैं, तो पूरे देश में एक ऐसा उग्र राष्ट्रव्यापी आंदोलन छिड़ेगा, जिसकी शुरुआत राजधानी दिल्ली में 'जंतर-मंतर 2.0' से होगी।यह पूरा विवाद तब भड़का जब एक मीडिया रिपोर्ट में यह विस्फोटक खुलासा हुआ कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर मतदाता सूचियों के साथ जो खेल हो रहा है, उस पर खुद चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों— सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी लिखित असहमति (objections) दर्ज कराई थी। इसके बावजूद, ज्ञानेश कुमार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए एकतरफा फैसले लिए।
ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े देशद्रोही हैंप्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके के शब्दों में ज्वाला धधक रही थी। उन्होंने बिना किसी खौफ के कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही हैं। उन्होंने भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। जब से ज्ञानेश कुमार इस पद पर बैठे हैं, यह सरकार तय कर रही है कि इस देश में किसे वोट देना है और किसे नहीं। क्या यही हमारा लोकतंत्र है? आपने लोकतंत्र की पूरी परिभाषा को ही उल्टा कर दिया है।"
13 करोड़ वोटों का रहस्य और BJP का 'रियल हीरो'दीपके ने जो आंकड़े देश के सामने रखे, वे किसी भी नागरिक की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से पूरे देश में 13 करोड़ से ज्यादा नाम साजिशन काट दिए गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में NDA और विपक्ष के बीच हार-जीत का फासला सिर्फ 2% का था, और इतने बड़े पैमाने पर वोटों का कटना (जो कुल मतदाताओं का 13 से 14 प्रतिशत है) इसी फासले को बढ़ाने की एक सोची-समझी खौफनाक साजिश थी।
BJP पर सीधा और तीखा निशाना साधते हुए दीपके ने एक ऐसा तंज कसा जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा, "BJP आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर या अपनी लोकप्रियता से नहीं, बल्कि ज्ञानेश कुमार की करामतों से चुनाव जीत रही है। BJP के 'रियल हीरो' मोदी जी नहीं, ज्ञानेश कुमार हैं! BJP के लिए उनकी इस वफादारी और लगन को देखते हुए तो पार्टी को उन्हें अपना आधिकारिक राष्ट्रीय प्रवक्ता ही घोषित कर देना चाहिए।"विपक्ष के मजबूत नेताओं की राजनीतिक हत्या की साजिश?दीपके का आक्रोश यहीं नहीं थमा। उन्होंने साफ कहा कि जब 2024 में BJP अपने दम पर बहुमत लाने में नाकाम रही, तो उनके खेमे में 'पैनिक बटन' दब गया। इसके बाद एक साजिश के तहत क्षेत्रीय क्षत्रपों और विपक्ष के मजबूत चेहरों को निशाना बनाया गया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कैसे एक सेट पैटर्न के तहत विपक्ष के दिग्गजों के चुनाव क्षेत्रों से वोट काटे गए:पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के क्षेत्र से 50,000 वोट हटाए गए, नतीजा— वह लगभग 15,000 वोटों से चुनाव हार गईं।तमिलनाडु में एमके स्टालिन के क्षेत्र से 1,00,000 वोट रातों-रात गायब कर दिए गए, नतीजा— वह 45,000 वोटों से हारे।दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र से 40,000 वोट डिलीट हुए, और हार का अंतर मात्र 4,000 से 5,000 वोटों का रहा।
दीपके ने केरल में पिनाराई विजयन और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के खिलाफ भी इसी तरह के सुनियोजित षड्यंत्र का आरोप लगाया। उनका दो टूक कहना है, "यह महज कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता, यह एक साफ और पारदर्शी पैटर्न है। ज्ञानेश कुमार स्वतंत्र चुनाव करवा नहीं रहे हैं, बल्कि वह बैठ कर इन चुनावों की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।"आर-पार की लड़ाई का ऐलानदीपके और सीजेपी (CJP) की मांगें एकदम स्पष्ट हैं— ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो, आने वाले सभी चुनाव तुरंत रोक दिए जाएं, SIR को फ्रीज किया जाए और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को वापस लागू किया जाए।यश इंडिया ट्वेंटी फोर (Yash India Twenty Four) के पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आज यह मुद्दा सिर्फ किसी एक राजनीतिक पार्टी या चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दीपके ने जो चिंगारी सुलगाई है, वह अब पूरे देश के युवाओं के दिलों में भड़क रही है। चुनाव आयोग जैसी पवित्र संवैधानिक संस्था, जिस पर देश के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है, आज शक के सबसे गहरे घेरे में है।
अब देश की निगाहें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। क्या सरकार और चुनाव आयोग इस राजनीतिक तूफान का सामना कर पाएंगे? या फिर भारत की सड़कें एक बार फिर उस युवा आक्रोश की गवाह बनेंगी, जो अब अपने वोट और अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए जंतर-मंतर 2.0 से लेकर पूरे देश में आर-पार की लड़ाई लड़ने का शंखनाद कर चुका है!
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